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Donor Egg और Donor Sperm क्या होता है? IVF में कब ज़रूरत पड़ती है

जब अपने अंडाणु या शुक्राणु से pregnancy संभव न हो, तब Donor Egg या Donor Sperm से IVF एक विकल्प हो सकता है। जानिए यह कब, कैसे और किन नियमों के साथ होता है।

Donor Egg और Donor Sperm क्या होता है? IVF में कब ज़रूरत पड़ती है

Donor Egg और Donor Sperm शब्द fertility treatment के दौरान अक्सर सुनने को मिलते हैं, लेकिन इनके बारे में सही जानकारी कम लोगों को होती है। Varanasi और पूर्वांचल के कई दंपति इन्हें लेकर उलझन में रहते हैं। इस लेख में आसान भाषा में समझिए कि ये क्या हैं और किन हालात में इनकी ज़रूरत पड़ती है।

Donor Egg क्या होता है?

जब किसी महिला के अपने अंडाणु (eggs) से pregnancy संभव न हो, तब किसी स्वस्थ महिला दाता (donor) के अंडाणु लेकर IVF किया जाता है। इन अंडाणुओं को पति के शुक्राणु से lab में fertilize किया जाता है और बने हुए embryo को उस महिला के गर्भाशय में रखा जाता है जो माँ बनना चाहती है। गर्भ और प्रसव उसी महिला का होता है।

Donor Egg की ज़रूरत कब पड़ती है?

  • अंडाणुओं का भंडार (ovarian reserve) बहुत कम होना
  • समय से पहले menopause (premature ovarian insufficiency)
  • बार-बार IVF असफल होना, खासकर अंडाणुओं की खराब गुणवत्ता के कारण
  • कुछ आनुवंशिक (genetic) बीमारियाँ जो बच्चे में जा सकती हैं
  • अधिक उम्र में अंडाणुओं की गुणवत्ता बहुत कम होना

Donor Sperm क्या होता है?

जब पति के शुक्राणुओं से pregnancy संभव न हो, तब किसी स्वस्थ पुरुष दाता के शुक्राणु (sperm bank से) इस्तेमाल किए जाते हैं। इसे IUI या IVF दोनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

Donor Sperm की ज़रूरत कब पड़ती है?

  • semen में शुक्राणु बिल्कुल न होना (azoospermia), जब surgery से भी शुक्राणु न मिलें
  • पति में कोई गंभीर आनुवंशिक बीमारी
  • बार-बार इलाज के बाद भी सफलता न मिलना

हर दंपति की स्थिति अलग होती है। कई बार ICSI जैसी तकनीक से पति के कम शुक्राणुओं से भी pregnancy संभव हो जाती है, इसलिए donor का निर्णय पूरी जाँच के बाद ही लिया जाता है।

क्या Donor Egg/Sperm से IVF सुरक्षित और कानूनी है?

भारत में यह प्रक्रिया Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 के नियमों के तहत होती है। इसमें:

  • दाता की उम्र, स्वास्थ्य जाँच और संक्रमण की जाँच ज़रूरी होती है
  • दाता और प्राप्तकर्ता दंपति की लिखित सहमति (consent) ली जाती है
  • दाता की पहचान गोपनीय रखी जाती है
  • पूरी प्रक्रिया पंजीकृत (registered) clinic या bank के माध्यम से होती है

भावनात्मक पहलू भी ज़रूरी

Donor से बच्चे का निर्णय दंपति के लिए भावनात्मक रूप से बड़ा होता है। इसलिए डॉक्टर के साथ खुलकर बात करना और counselling लेना बहुत मददगार होता है।

Varanasi में सलाह कहाँ लें?

Jamuna Sewa Sadan Hospital, Shivpur में IVF और infertility care के लिए Dr. Parnnika Agrawal से परामर्श लिया जा सकता है। सही diagnosis से ही सही इलाज चुना जा सकता है। अपॉइंटमेंट बुक करें या +91-8546059897 पर कॉल करें।

Frequently asked questions

Donor egg से पैदा हुआ बच्चा किसका होता है?

गर्भ और प्रसव माँ बनने वाली महिला का होता है, और कानूनी रूप से बच्चा उसी दंपति का होता है। भारत में यह ART Act, 2021 के नियमों के तहत होता है।

क्या donor की पहचान बताई जाती है?

नहीं, नियमों के अनुसार दाता की पहचान गोपनीय रखी जाती है।

Donor egg की ज़रूरत कब पड़ती है?

जब अंडाणुओं का भंडार बहुत कम हो, समय से पहले menopause हो, या अंडाणुओं की खराब गुणवत्ता के कारण बार-बार IVF असफल हो रहा हो।

क्या कम sperm count में donor sperm ज़रूरी है?

हमेशा नहीं। कई मामलों में ICSI से पति के कम शुक्राणुओं से भी pregnancy संभव है। निर्णय जाँच के बाद लिया जाता है।

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This article is for general awareness and is not a substitute for medical advice. Please consult a doctor for diagnosis and treatment.

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